मैं अपने माता-पिता एवं भाई बहन के साथ राजधानी एक्सप्रेस मंे बैंगलौर जा रहे थे। राजधानी टेªन मंे ऐसे भी सफर बहुत अच्छा लगता है रास्ते भर खाने पीने के लिए पूछते रहते हैं और यदि टेªन मंे अच्छे लोग मिल जाते हें तो सफर का आनन्द दुगना हो जाता है हमारे कोच में बढ़े, बच्चे, हम उम्र सभी लोग थे पेरेन्ट्स अपनी उम्र के साथ बात कर रहे थे मेरे सामने की सीट पर एक लड़की अकेले सफर कर रही थी जोकि मेेरे शहर की तथा मेरे घर के पास ही रहती थी मैं उससे पहले कभी नहीं मिला था रास्ते भर हम लोग अपने स्कूल कालेज की बातें करते रहे। स्कूल मंे किस तरह खेलते थे। छोटी-छोटी बातंे, यादंे जीवन के सफर मंे किस प्रकार आनन्द देती है। इस यात्रा मंे मैंने प्राप्त किया।
दूसरे दिन हम लोग बैंगलोर पहुँच गए वहाँ पर हम लोग वृन्दावन गार्डेन भी गए जोकि वहाँ का प्रसिद्ध गार्डेन है। वहाँ पर खूब इन्ज्वाय किया फिर हमलोग शांिपंग काम्पलैक्स भी गए। दूसरे दिन मैसूर के लिए रवाना हुए। और वहाँ का राज महल एवं कई स्थल देखे। वहाँ के सभी स्थल देखने योग्य हैं। उसके बाद हम लोग गोवा चले गए। जहाँ पर समुद्र का खूब आनन्द उठाया। वहाँ से हमलोग मुंबई लौटे रास्ते में टेªन टर्मिनलांे से होकर गुजर रही थी वहाँ का नजारा देखने योग्य था।
बुधवार, 10 दिसंबर 2008
मंगलवार, 9 दिसंबर 2008
बीजी और पापा
इस महीने मेरे नाना और नानी का साठवह प्रतिवार्षिक तिथि है. लेकिन, में नाना और नानी नहीं कहते है. में अपने नाना, पापा बुलाती हैं, और अपने नानी, बीजी बुलाती हैं. मेरी बीजी शादी की जब वे सोलह साल की थी. दो साल बाद वे अपनी बड़ी मौसी को पैदा किए. फ़िर वे दो और लड़की और दो और लड़का हुए. वे सब, शादी करके, अम्रीका आ गए. फ़िर मेरे बीजी और पापा भी आ गए. अब वे तीस साल से यहाँ रहे. लेकिन, फ़िर भी वे एक घर चंदिघर में है. हर दिसम्बर, दो महीने हे लिए वे भारत जाते है. वे दोनों भारत ज्यादा अच्छे लगते. वे सिफत यहाँ अम्रीका में रहते हैं क्यूंकि उनके सरे परिवार यहाँ है.
मुंबई
आज कल भारत बहुत कठिन समय में हैं. दो हफ्ते पहले, मुंबई में बहुत आक्रमण थे. छत्रपती शिवाजी टर्मिनस, औब्रोई होटल, ताज महल पेलेस होटल, लिओपोल्ड कैफे, कामा होस्पिताल, नरीमन हॉउस (एक ओर्थोडोक्स जेविश का जगा), मेट्रो सिनिमा और टेम्स ऑफ़ इंडिया के पीछे आक्रमण हुए. मज़गओं डॉक्स में भी एक बम विस्फोट था. एक सो अठासी लोग मरे और तीन सो तिरानवे लोग चोट हुए. हिन्दुस्तानी सरकार कहते है की पाकिस्तानी लोग उत्तरदाता हैं. कोई नहीं जानते अब क्या होगा. कोई कहते है की भारत पाकिस्तान के सात लड़ाई होंगे. हम बस इंतजार कर सकते है.
जाड़ा
अज कल मोसम बहुत ख़राब है. मुझे जाड़ा बिल्कुल पसंद नही करती. बहुत ठंडा है और बहुत बर्फ पड़ता हैं. जब यह होता है, तो फिर क्लास जाने बहुत मुश्किल है. सायद वाक्स अनिश्चित होता है और पैदल जाना बहुत कठिन हैं. गाड़ी चलाना मुश्किल भी होती है, क्योंकि सड़क भी अनिश्चित होता हैं. अक्सीद्न्ट्स बहुत होता है, और लोग मरते हैं. और, क्यूंकि बहुत ठंडा हैं, लोगो बीमार होता हैं. खाँसी आती हैं, नक् चलता हैं, और बुखार परता हैं. जाड़ा में सिर्फ़ दो चिसे अच्छी होती हैं. और वे बर्फ की आदमी और बर्फ की लड़ाई. बर्फ की आदमी बनाना और बर्फ का लड़ाई बहुत मज़े आते हैं.
सोमवार, 8 दिसंबर 2008
हिन्दी कक्षा पर विचार
अमरीका मे तीन साल लगातार रहने से मेरी हिन्दी काफ़ी बिगड़ गई थी। हाँ, मै अपने दोस्तों से हिन्दी मे ज़रूर बातचीत करता था, परन्तु मेरी भाषा की शुद्धता, जिसपर मुझे अधिक गर्व था, कहीं गुप्त हो गई थी। मेरे मुताबिक इसकी वजह है कि मिशिगन विश्वविद्यालय के भारतीय विद्यार्थी भारत के हर कोने से हैं। भारत के अलग-अलग प्रांतों मे हिन्दी बोलने का ढंग एक समान नही होता। तीन सालों के दौरान, मैने अंजान मे हिन्दी बोलने के अलग ढंग अपनी भाषा मे अपना लिए।
फिर सितंबर मे मैने हिन्दी कक्षा मे दाखिला लिया। सच कहूँ तो मैने सोचा ही नही था कि चार महीनों मे मेरी हिन्दी मे ज़्यादा सुधार आएगा। परन्तु, आज मुझे साफ़ दिख रहा है कि हिन्दी लघु कथाएं पढ़ने से और ब्लाग लिखने से मेरी हिन्दी मे काफ़ी सुधार आया है। शुरू-शुरू मे मुझे ब्लाग लिखने मे काफी समय लग जाता था, परन्तु अब, मै कम समय मे 200 शब्द का ब्लाग लिख लेता हूँ।
मै इंजीनियरिंग पढ़ रहा हूँ और लगातार इंजीनियरिंग पढ़ने से मन सूख जाता है। हिन्दी पढ़ने से मुझे हफते मे कुछ घंटों के लिए इंजीनियरिंग से छुटकारा मिल जाता है। देखा जाए तो मै बहुत ही खुश हूँ कि मैने हिन्दी कक्षा मे दाखिला लेने का फैसला किया।
फिर सितंबर मे मैने हिन्दी कक्षा मे दाखिला लिया। सच कहूँ तो मैने सोचा ही नही था कि चार महीनों मे मेरी हिन्दी मे ज़्यादा सुधार आएगा। परन्तु, आज मुझे साफ़ दिख रहा है कि हिन्दी लघु कथाएं पढ़ने से और ब्लाग लिखने से मेरी हिन्दी मे काफ़ी सुधार आया है। शुरू-शुरू मे मुझे ब्लाग लिखने मे काफी समय लग जाता था, परन्तु अब, मै कम समय मे 200 शब्द का ब्लाग लिख लेता हूँ।
मै इंजीनियरिंग पढ़ रहा हूँ और लगातार इंजीनियरिंग पढ़ने से मन सूख जाता है। हिन्दी पढ़ने से मुझे हफते मे कुछ घंटों के लिए इंजीनियरिंग से छुटकारा मिल जाता है। देखा जाए तो मै बहुत ही खुश हूँ कि मैने हिन्दी कक्षा मे दाखिला लेने का फैसला किया।
शेयर बाजार
शेयर बाजार एक अनिश्चितता का बाजार है इस बाजार में वस्तुओं का आदान-प्रदान नहीं होता है बल्कि यहां पर कम्पनीयों के शेयर लिस्टेड किये जाते हैं। जिससे कम्पनीयां सीधे तौर पर जनता से जुड़ सके तथा शेयर देकर रूपया ले सकें और उन्हें जनता का भागीदार बनाया जा सके, इससे कम्पनीयों पर भी ब्याज का बोझ न पड़े और जिससे देश का विकास हो सके।
परन्तु शेयर बाजार सच पर आधारित नहीं होता है बल्कि अफवाहों के ऊपर चलता रहता है। नेताओं की बयानबाजी के ऊपर भी चलता है नेताओं की बयानबाजी का विश्शण किया जाता है और उसी से बाजार ऊपर नीचे होता रहता है बहुत सी कम्पनीयां घाटे में होने के बावजूद शेयर उसका ऊपर रहता है जबकि किसी कम्पनी का अच्छा रिजल्ट आने पर भी उसका शेयर नहीं बढ़ता है कई कम्पनियां बाजार से रूपये उगाहने के लिये कुछ साल तक अच्छा प्राॅफिट दिखाती रहती है परन्तु रूपये उगाहने के बाद घाटा दिखाने लगती है, इसमें सरकार के अफसरों का भी सहयोग मिलता रहता है।
यह बजार जोखिम से भरा हुआ है तथा कुछ स्वार्थी तत्वों के कारण अपनी गरिमा खोने लगता है तथा कुछ कम्पनियां भी इस कार्य में अप्रत्यक्ष तौर पर शामिल हो सकती हैं।
परन्तु शेयर बाजार सच पर आधारित नहीं होता है बल्कि अफवाहों के ऊपर चलता रहता है। नेताओं की बयानबाजी के ऊपर भी चलता है नेताओं की बयानबाजी का विश्शण किया जाता है और उसी से बाजार ऊपर नीचे होता रहता है बहुत सी कम्पनीयां घाटे में होने के बावजूद शेयर उसका ऊपर रहता है जबकि किसी कम्पनी का अच्छा रिजल्ट आने पर भी उसका शेयर नहीं बढ़ता है कई कम्पनियां बाजार से रूपये उगाहने के लिये कुछ साल तक अच्छा प्राॅफिट दिखाती रहती है परन्तु रूपये उगाहने के बाद घाटा दिखाने लगती है, इसमें सरकार के अफसरों का भी सहयोग मिलता रहता है।
यह बजार जोखिम से भरा हुआ है तथा कुछ स्वार्थी तत्वों के कारण अपनी गरिमा खोने लगता है तथा कुछ कम्पनियां भी इस कार्य में अप्रत्यक्ष तौर पर शामिल हो सकती हैं।
दार्जलिंग एवं सिक्किम यात्रा
सन् 2005 में अपने-अपने माता-पिता एवं बहन तथा कुछ परिवारिक सदस्यों के साथ दार्जलिंग के लिए सिलीगुड़ी से रवाना हुआ। रास्ते में हरी-हरी वादियां खेत धरती पर स्वर्ग जैसा महसूस हो रहा था रास्ते में छोटी ट्रेन मिली जोकि हम लोगों के साथ-साथ चल रही थी बहुत ही मनमोहक दृश्य लग रहा था। हम लोग दार्जलिंग में होटल मं ठहरे वहां से माल रोड़ का नजारा दिखाई दे रहा था हम लोग रवाना खाकर रात में माल रोड घूमने गये दूसरे दिन बाजार घूमते रहे। हम लोग तीसरे दिन फाॅल देखने गये जोकि दर्जलिंग से करीब 3000 फिट नीचे था इस दृश्य का बयान करना एक पेज में असम्भव सा है बहुत खुबसूरत नजारा लग रहा था यहां पर दो तीन घंटे बिताने के बाद चूंकि हम लोगों को सिक्किम भी जाना था। सिक्किम के लिए रवाना हो गये रास्ते में छोटे-छोटे झरने, हरी-हरी वादियां, घुमावदार सड़के तथा रास्ते में एक इंजीनियरिंग कालेज बहुत ही खूबसूरत लग रहा था।
सिक्किम में तीन दिन रहे दूसरे दिन हम लोग चाइना बार्डर, एक सेनानी का मन्दिर जोकि देखने लायक था कहा जाता है कि यह सैनिक अपनी हर माह तन्खवाह लेने आता है जबकि उसे मरे हुए कई साल बीत चुके है उसके कपड़े जूते सभी कमरे में लगे हुए थे जो कि फ्रेश लग रहे थे यह सब देखने के बाद हम लोग वापस गैंगटोक के लिये रवाना हो गयेे रास्ते में एक जगह सड़क धस गयी थी जिसमें हम लोग एवं अन्य लोगों ने भी पत्थर उठा-उठाकर सड़क बनाने की कोशिश की इतने में सरकारी गाड़ी सड़क बनाने के लिये पहुंच गयी और हम लोग बहुत किनारे-किनारे से गाड़ी को निकालते हुये गैगटोक पहुंच गये दूसरे दिन गैगटोक घूमे और बाद में सिलीगुड़ी के लिये वापस रवाना हो गये।
सिक्किम में तीन दिन रहे दूसरे दिन हम लोग चाइना बार्डर, एक सेनानी का मन्दिर जोकि देखने लायक था कहा जाता है कि यह सैनिक अपनी हर माह तन्खवाह लेने आता है जबकि उसे मरे हुए कई साल बीत चुके है उसके कपड़े जूते सभी कमरे में लगे हुए थे जो कि फ्रेश लग रहे थे यह सब देखने के बाद हम लोग वापस गैंगटोक के लिये रवाना हो गयेे रास्ते में एक जगह सड़क धस गयी थी जिसमें हम लोग एवं अन्य लोगों ने भी पत्थर उठा-उठाकर सड़क बनाने की कोशिश की इतने में सरकारी गाड़ी सड़क बनाने के लिये पहुंच गयी और हम लोग बहुत किनारे-किनारे से गाड़ी को निकालते हुये गैगटोक पहुंच गये दूसरे दिन गैगटोक घूमे और बाद में सिलीगुड़ी के लिये वापस रवाना हो गये।
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