सोमवार, 9 फ़रवरी 2009

आई डोंट नो

अगर आप मेरे पिछले ब्लॉग से परेशान नही हुए तो यह लीजिये , एक और नई ताज़ी पकाऊ ब्लॉग तैयार है | पिछले ब्लॉग में परीक्षा का ज़िक्र करते हुए याद आया वह समय ज़िन्दगी का जब मैं बेहद असमंजस की स्तिथि में थी | मनिपाल के आखिरी सेमिस्टर की बात थी जब उनीवेरसितीस से जवाब आने शुरू हो गए थे | याद है मुझे वह दिन जब मिचिगन से एडमिट की ख़बर आई थी , खुशी तो बहुत हुई थी परन्तु चंद घंटो के लिए ही , उसके बाद सब कुछ धुन्दला लगने लगा | दोस्त बधाई देते थे , पूछते थे मुझे कैसा लग रहा है और अन्दर ही अन्दर मेरे " आई डोंट नो " गूंजता था | मुझे पता ही नही था आख़िर मैं चाहती क्या हूँ ज़िन्दगी से | बस हर दिन को वन - डे की तरह खेलती जा रही हूँ , कभी डक आउट तो कभी एक आद रन बन जाते हैं | कोई उत्साह नही , कोई उल्लास नही | सच कहूं तो हालत अभी भी वैसी ही है | वैसे बिना डेस्टिनेशन के ज्ञान से कभी कोई ट्रेन या बस नही पकड़ी , तो फिर बिना मंजिल के इस सफर में कैसे चल पड़ी , मैं नही जानती | जानती हूँ तो बस इतनकी कुछ करना है , जिससे कि दस साल बाद किस भी सवाल का जवाब " आई डोंट नो " ना हो | वैसे आपको कोई और काम नही है करने को जो आप इतनी फुर्सत से यह ब्लॉग पढ़ रहे हैं ? " यू टू डोंट नो , राइट ?" इश !

1 टिप्पणी:

Santhosh ने कहा…

good one...thanks..

I want to know that,
Google has got only 5 Indian languages ...do u know any other ...which can provide Gujarathi, Marathi,Bengali & Punjabi..?