सोमवार, 1 दिसंबर 2008

बेरोजगारी की बढ़ती समस्या

बेरोजगारी की समस्या को हल नहीं किया गया तो देश में सामाजिक असंतोष फैल सकता है। प्रत्येक देश के लिए बेरोजगारी एक भयंकर समस्या है। रोजगार व्यक्ति जहां समाज में उत्पादन वृद्धि में योगदान करता है वही बेरोजगार व्यक्ति अर्थ-व्यवस्था पर बोझ बन जाता है बेरोजगारी मनुष्य के आत्मविश्वास को खोखला कर उसमें हीनता भर देती है इस प्रकार मनुष्य निराशवादी हो जाता है और उसके मन में समाज के प्रति आक्रोश उत्पन्न होने लगता है और आगे चलकर सामाजिक असंतोष का कारण बनता है।

देश में लूटपाट, चोरी, डकैती, हत्या, फिरौती के लिए अपहरण जैसे अपराधों में बढ़ोत्तरी बेरोजगारी के कारण ही हो रही है।
वर्तमान में अर्थव्यवस्था की मार सबसे अधिक विकासशाील देशों को भुगतनी पड़ रही है और आगे बहुत अधिक भुगतना पड़ेगा क्योंकि विकासशाील देशों में पैसा सही कार्योे में पूरा खर्च नहीं हो पा रहा है अधिकतर पैसे का दूरूपयोग हो रहा है और रूपयो की उगाई में टैक्स पर टैक्स लगाया जाता है जिससे महंगाई बढ़ती चली जा रही है सबसे अधिक कठिन समय मध्यम वर्ग के लिये हो रहा है।

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